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अब स्वस्थ रहने के सूत्र को हर वॉट्सऐप के माध्यम से जन जन तक पहोचाना हैं
आज कल विटामिन डी व कैल्सियम की कमी की बीमारी लगातार बढ़ रही है ।

बीमारी का कारण

  • रिफाइंड (समुद्री नमक चीनी तेल ) व चाय का अधिक सेवन ।
  • अप्राकृतिक पदार्थो का सेवन जंक फूड या कोल्ड्रिंक व अल्कोहल का सेवन ।
  • पोषण की कमी व कमजोर पाचनतंत्र मन्द जठराग्नि ।
  • भोजन के साथ व तुरन्त बाद में पानी पीना ।
  • जीवन जरूरी प्रकृति की गोद को छोड़कर वातानुकिलत कमरों में बंद होना ।

आईये समझते है आखिर कैसे होती है कैल्सियम और विटामिन डी की डिफिशिएंसी ।

एक स्वस्थ्य व्यक्ति में कैल्सियम की मात्रा 8.6 से 10.2 mg/dlके मध्य होना चाहिए।

25 Hydroxy विटामिन डी मतलब स्वस्थ्य व्यक्ति में 32 (ng/ml) नैनोग्राम से 100 नैनो ग्राम के मध्य होना चाहिए।

यदि विटामिन डी 12 mg/ml से कम होता है तो इसे विटामिन डी डिफिशिएंसी बोलते है ।

कैल्सियम की मात्रा जब 8.6 mg से कम होती है तो हड्डियां कमजोर होती है व आस्टियोप्रोसिस का खतरा बन जाता है।

1300 मिलीग्राम कैल्सियम देशी गाय के 2 गिलास दूध से मिल जाता है ।

19 वर्ष से 50 वर्ष 1000mg देशी गाय के 1 गिलास दूध में मिल जाता है ।

50 से 70 वर्ष के पुरुष में 1000 mg व महिला में 1300 mg आवश्यकता होती है ।

आयुर्वेद उपचार

  • चम्मच कच्ची हल्दी का रस व 50 ml गौमूत्र का सेवन ।
  • प्राकृतिक विधि से तैयार देशी गाय के घी रात्रि में सोते समय नाक में डाले ।
  • रात्रि में सोते समय देशी गाय का घी हल्दी दूध में फेंटकर सेवन करे ।
  • बादाम रोगन की शरीर मे मालिशकरे ।
  • चुना गेंहू के दाने के बराबर या पान के पत्ते पर केवल चूना लगाकर खाये ।
  • देशी गाय का दूध या दूध से बनने वाले पदार्थ का उपयोग करे जैसे दूध दही , छांछ , पनीर इत्यादि ।
  • फल में आंवला संतरा इसमे विटामिन डी व कैल्सियम प्रचूर मात्रा में उपलब्ध होता है ।
  • बादाम रात को पानी मे भिगोकर प्रातः सेवन करे ।
  • जौ ,चना ,बाजरा ,मक्का , रागी इन सभी अनाजो में विटामिन डी व कैल्सियम प्रचूर मात्रा में उपलब्ध होता है ।
  • विटामिन डी की आपूर्ति के सूर्योदय के समय पहली धूप पर्याप्त होती है ।

अगली पीढ़ी (नेक्स्ट जनरेशन ) को बचा लो|

अपनी खानपान की गंदी आदतें अपने बच्चों में न डालें आप जो भी बच्चों को खिलाएंगे उन्हें वही खाने की आदत लगेगी

जो लोग पेत्रिक जेनेटिक रोगों से ग्रसित हैं वे अपनी अगली पीढ़ी में सुधार कर सकते हैं अपनी उन गलती ओं को न दोहराकर जो हमारे बुजुर्ग व हम अबतक करते आए हैं

खासकर लाड़ प्यार में सबकुछ देकर खिलाकर पुरानी गलतीयां बार-बार न दोहराएं अपने बच्चों में खराब खानपान की आदत न डालें जिनके बच्चे नहीं हैं वे स्वयं की आदतें खानपान आचरण की सुधारें ताकि अगली पीढ़ी में वे खानपान आचरण की आदतें न पहुंचें

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