मधुमेह | Diabetes

होता कैसे है

मधुमेह रोग एक दम से नही होता कि रात को अच्छे भले सोये और सुबह उठे कि पता चला कि मधुमेह रोगी हो गये। किया गया भोजन पेट में जाकर एक प्रकार के ईधन में बदलता है जिसे ग्लूकोज कहते है ये एक तरह कि शर्करा होती है। ग्लूकोज रक्त धारा में मिलता है और शरीर की लाखो कोशिकाओं में जाता है। अग्नाश्य वो अंग है जो रसायन उत्पन करता है जिसे इंसुलिन केहते है। इंसुलिन रक्त धारा में मिलता है और कोशिकाओं तक जाता है, ये ग्लूकोज से मिलकर ही कोशिकाओं तक जा सकता है। शरीर को ऊर्जा देने के लिये कोशिकाये ग्लूकोज को जलाते हुए पाचन करती है। ये प्रकिर्या समान्य शरीर में होती है। जो कर्बोहाय्ड्रेट हम खाते है वो ग्लूकोज बनकर रक्त में चला जाता है। ये सेल (कोशिकाओं)में जाये इसके लिये इंसुलिन नामक हार्मोन कि ज़रूरत होती है ,इंसुलिन के बिना रक्त से सेल के अंदर ग्लूकोज जा ही नही सकता। ये इंसुलिन ,pancreas नामक ग्रंथि के बीटा सेल्स से रिसता है। आनुवंशिक ,गलत खान पान ,और शारीरिक व्यायाम की कमी में बीटा सेल्स से इंसुलिन रिसने की श्रमता ख़त्म होने लगती है। तब इंसुलिन की शरीर में कमी हो जाती है ,जो इंसुलिन होता है वो भी नाकाम हो जाता है। तब ग्लूकोज रक्त में बढ़ता जाता है मगर सेल्स के अंदर नही घुस पाता ,ये ही है मधुमेह की अवस्था। मधुमेह होने पर शरीर को भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने में कठिनाई होती है। पेट फ़िर भी भोजन को ग्लूकोज में बदलता रह्ता है, ग्लूकोज कोशिकाओं में नही जा सकता और रक्त धारा में ही बना रहता है। इसी को उच्च रक्त ग्लूकोज केहते है। कोशिकाओं में पर्याप्त ग्लूकोज ना होने के कारण कोशिकाये उतनी ऊर्जा नही बना पाती जिससे शरीर सुचारु रुप से चल सके।
यदि रक्त में शर्करा का स्तर लम्बे समय तक समान्य से ज्यादा बना रहता है तो उच्च रक्त ग्लूकोज अधिक समय के बाद विषैला हो जाता है। अधिक समय के बाद ये शरीर के प्रमुख अंगो और स्नायाऔ को खराब कर देता है। जिस अंग की नडिया ब्लोक होने लगे उसी में रोग हो जाता है। रोगियों की रक्त की नालियों की दीवारों में निरंतर चर्बी और calcium। इकठ्ठा होने की प्रक्रिया चलती रहती है जिससे नालिया सिकुड़ने लगती है। अगर शरीर के अंगो को शुध्द रक्त आक्सीजन तथा भोजन प्राय्प्त मात्रा में नही मिलेगा तो एक दिन दिल कर दौरे की सम्भावना बन जाती है किस्मे।

टाइप १

  • pancreas की बीटा कोशिकाये पूरी नष्ट हो जाती है और इंसुलिन का बनना सम्भव नही होता।
  • कुछ कारणों से बचपन से ही ऐसा हो जाता है ये मुख्य रुप से 12-25साल से कम अवस्था में मिलती है।
  • इनको बिना इंसुलिन सुई आराम नन्ही मिलता है भारत में केस कम है।
  • इनके लक्षण है -निरंतर भूख लगना।
  • वजन कम होना।
  • दृष्टि में धुँधलापन आना।
  • ज्यादा मोटापा प्यास और पेशाब बढ़ना।
  • थकान होना ,तनाव का बढ़ना।
टाइप २

ऐसे में बीटा कोशिकाएँ कुछ कुछ इंसुलिन बनाती है, कुछ बना हुआ इंसुलिन मोटापे शरीरक मेहनत की कमी के कारण बेकार हो जाता है। इस तरह के लोग मोटे होते है ज्यादातर इनका पेट निकला होता है। पारिवारिक इतिहास होता है। रोग धीरे धीरे बढ़ता है शुरू में लक्षण दिखाई नही देते।