कर्कट रोग | कर्क रोग | Cancer

कर्कट (चिकित्सकीय पद: दुर्दम नववृद्धि) रोगों का एक वर्ग है जिसमें कोशिकाओं का एक समूह अनियंत्रित वृद्धि (सामान्य सीमा से अधिक विभाजन), रोग आक्रमण (आस-पास के उतकों का विनाश और उन पर आक्रमण) और कभी कभी अपररूपांतरण अथवा मेटास्टैसिस (लसिका या रक्त के माध्यम से शरीर के अन्य भागों में फ़ैल जाता है) प्रदर्शित करता है। कर्कट के ये तीन दुर्दम लक्षण इसे सौम्य गाँठ (ट्यूमर या अबुर्द) से विभेदित करते हैं, जो स्वयं सीमित हैं, आक्रामक नहीं हैं या अपररूपांतरण प्रर्दशित नहीं करते हैं। अधिकांश कर्कट एक गाँठ या अबुर्द (ट्यूमर) बनाते हैं, लेकिन कुछ, जैसे रक्त कर्कट (श्वेतरक्तता) गाँठ नहीं बनाता है। चिकित्सा की वह शाखा जो कर्कट के अध्ययन, निदान, उपचार और रोकथाम से सम्बंधित है, ऑन्कोलॉजी या अर्बुदविज्ञान कहलाती है।

चिन्ह और लक्षण

मोटे तौर पर, कर्कट के लक्षणों को तीन समूहों में विभाजित किया जा सकता है:

  • स्थानीय लक्षण : असामान्य गाँठ या सूजन (अबुर्द), रक्तस्राव (खून बहना), पीड़ा और / या व्रनोदभवन (अल्सर का निर्माण). आसपास के ऊतकों में संपीड़न की वजह से पीलिया जैसे लक्षण पैदा हो सकते हैं (आंखों और त्वचा का पीलापन).
  • मेटास्टेसिस (फैलना) के लक्षण : लसिका पर्वों का आकार में बढ़ना, खाँसी और हिमोपटायसिस, हिपेटोमिगेली (यकृत का आकार में बढ़ना), अस्थि पीडा (हड्डी में दर्द), प्रभावित अस्थियों का टूटना और तंत्रीकीय लक्षण.
  • प्रणालीगत लक्षण : वजन घटना, भूख में कमी, थकान और कैचेक्सिया (व्यर्थ होना), अत्यधिक पसीना आना (रात को पसीना आना), रक्ताल्पता और विशिष्ट पेरानियोप्लास्टिक घटना, अर्थात विशेष परिस्थितियां जो सक्रिय कर्कट के कारण होती हैं जैसे घनास्त्रता (थ्रोम्बोसिस) या हार्मोन परिवर्तन.

कारण

कर्कट भिन्न रोगों का एक वर्ग है जो अपने कारणों और जैव-विज्ञान में व्यापक भिन्नता रखते हैं। कोई भी जीव, यहां तक कि पौधों, में भी कर्कट कैंसर हो सकता है। लगभग सभी कर्कट कैंसर धीरे धीरे बढ़ते हैं, कर्कट और कैंसर की कोशिकाओं और इसकी पुत्री कोशिकाओं में त्रुटि उत्पन्न हो जाती है