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Joint and Muscle Pain – Ayurveda advice Part 1


Joint and Muscle Pain - Ayurveda advice Part 1

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जोड़ों एवं मांसपेशियों का दर्द – आयुर्वेद की सलाह

जोड़ों और मांसपेशियों का दर्द लोगों में पाई जाने वाली सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। ज्यादातर देखा गया है सभी लोगों को अपने जीवन में कहीं ना कहीं एक समय काल में या जीवन भर मांसपेशियों में दर्द होता ही है। मांसपेशियों मैं दर्द तनाव या चोटों के कारण हो सकता है और जोड़ों का दर्द गठिया जैसे रोगों का कारण हो सकता है। यह जोड़ों का दर्द हमारे जीवन की गुणवत्ता पर बहुत ज्यादा असर करता है। सर्जरी के द्वारा भविष्य मैं होने वाली असर के लिए ना सोच कर लोग सर्जरी तो करवा लेते हैं और घुटनों तथा रीढ़ के भाग की सर्जरी करवाते हैं। और भविष्य में काफी तकलीफों से भी गुजरते हैं। परंतु आज जोड़ों के दर्द और मांसपेशियों के दर्द को सही तरीके से समझने की और मार्गदर्शन लेने की आवश्यकता है। आयुर्वेद जोड़ों और मांसपेशियों के लिए सही तरीके से दृष्टिकोण प्रदान करता है और उसके लिए क्या कर सकते हैं वह भी बताता है।

Joint and Muscle Pain – Ayurveda advice Part 1

जोड़ों और मांसपेशियों का दर्द क्या है?

जोड़ शरीर के ऐसे भाग है जहां पर हड्डियां मिलती है। जैसे के कंधे, घुटने, कलाई, कूल्हे और टखने यह शरीर के महत्वपूर्ण अंग है, जिनके जोड़ होते हैं। जोड़ों के दर्द के कई कारण हो सकते हैं और कई बार आराम करने से इससे राहत भी मिल जाती है।

मांसपेशियों में होने वाला दर्द बहुत ही आम समस्या है, जिसका ज्यादातर लोग अनुभव करते ही है। मांसपेशियों का घेराव पूरे शरीर में हर जगह स्थित होता है। चोट और खिंचाव के अलावा कुछ बीमारियों के कारण भी मांसपेशियों में दर्द हो सकता है। मांसपेशियों के दर्द को घर पर ही इलाज करने में आसानी होती है, जब के जोड़ों के दर्द में यह थोड़ा मुश्किल भी होता है। उम्र बढ़ने के कारण भी मांसपेशियों में दर्द हो सकता है। जब दर्द पुराना होता है तो इसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता होती है और यह जोड़ों को स्थाई नुकसान से बचने में कामयाब होता है।

जोड़ों के दर्द के लक्षण

  • जोड़ के आसपास के हिस्से में दर्द होना। यह दर्द हल्का, मध्यम या गंभीर भी हो सकता है।
  • सूजन के कारण ऐसी जगह में लालिमा और गर्मी होती है।
  • असर कारक भागों में कोमलता जोड़ों के दर्द का कारण है।
  • दर्द से प्रभावित हिस्से को हिलाना मुश्किल हो जाता है। बैठने या सोने की स्थिति से उठने में मुश्किल होती है। सीढ़ियों से ऊपर या नीचे आते वक्त तकलीफ होती है, दर्द भी होता है।
  • असर कारक हिस्सा कठोर हो जाता है, जम जाता है, खासकर आराम के बाद यह तकलीफ होती है।
  • जोड़ों की गति की पूरी रचना में असर होता है।
  • असर कारक हिस्सा कमजोर हो सकता है।
  • कुछ प्रकार के गठिया में अन्य अंग भी प्रभावित होते हैं।
  • कभी-कभी, कोई परिस्थिति में बुखार के साथ जोड़ों का दर्द भी हो सकता है।

जोड़ों एवं मांसपेशियों के स्वास्थ्य का महत्व,

हमारे शरीर के जोड़ ही है, जो शरीर को लचीलापन देते हैं। वह हमें बैठने में, खड़े होने में, अपने हाथों को हिलाने में, चलने में आदि सारी चीजों में मदद करते हैं। जोड़ों में होने वाला कोई भी दर्द सामान्य कार्य को भी मुश्किल बना देता है। जैसे-जैसे दर्द गंभीर बनता है, बढ़ता है, तो साधारण चीजें जैसे के कुर्सी से उठना यह भी एक समस्या बन जाती है। चलने में भी बड़ी तकलीफ होती है। उम्र बढ़ने के कारण या कई बीमारियों के कारण यह जोड़ों में दर्द हो सकता है। इसीलिए जोड़ों को स्वस्थ रखना बहुत ही महत्वपूर्ण है। जब जोड़ स्वस्थ होते हैं, तो जोड़ों के खराब होने का खतरा कम हो जाता है। और छोटी-छोटी चीजें भी हम उम्र बढ़ते भी कर सकते हैं।

सूर्य प्रकाश का संपर्क

हड्डियों और मांसपेशियों का स्वास्थ्य भी जोड़ों से ही जुड़ा होता है। शरीर को मजबूत करने और स्वस्थ रखने की बहुत आवश्यकता है। और इसे करने के बहुत तरीके हैं। विटामिन डी और कैल्शियम बहुत ही महत्वपूर्ण घटक है, जो शरीर के जोड़ों और मांसपेशियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। विटामिन डी सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने से स्वाभाविक रूप से प्राप्त हो सकता है और कैल्शियम दूध उत्पादकों से और प्राकृतिक चुने से लिया जा सकता है।

आहार के अलावा जोड़ों और मांसपेशियों के स्वास्थ्य को बनाए

आहार के अलावा जोड़ों और मांसपेशियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए और तकलीफों को कम करने के लिए व्यायाम बहुत ही महत्वपूर्ण है। मांसपेशियों और जोड़ों को कठोर होने से बचाने के लिए शारीरिक रूप से सक्रिय होना बहुत महत्वपूर्ण है। इसीलिए सप्ताह में कम से कम 200 मिनट का नियमित व्यायाम महत्वपूर्ण है। यह जोड़ों और हड्डियों को अच्छे स्वास्थ्य में रखने में मदद करता है और लचीलापन के साथ शरीर को अच्छा रखता है। जब हम जोड़ों और मांसपेशियों के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो उम्र बढ़ने पर आने वाली जोड़ों की समस्याओं को हम टाल सकते हैं।

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कोई भी चीज को हमें सामान्य नहीं समझना चाहिए। क्योंकि सामान्य चीज भी जब बढ़ जाती है, तो वह गहरी तकलीफ देती है। जोड़ों का दर्द भी ऐसा ही कार्य करता है। सामान्य तौर पर कम उम्र होती है तब हम कई काम गलत तरीके से करते हैं। कई कार्य शक्ति से बाहर जाकर करते हैं। यह समय पर मांसपेशियों और जोड़ों में बहुत ज्यादा तनाव उत्पन्न होता है। कम उम्र होती है, तब शरीर की रचना उच्चतम स्थिति पर कार्य करती है, इस वजह से तुरंत हमें असर नहीं दिखती। दिखती है तो थोड़ी बहुत लगती है, इसलिए हम ज्यादा ध्यान नहीं देते। पर उम्र के बढ़ने से कमजोरी बढ़ती है और यह जो कम उम्र में असर हुई चीज उम्र बढ़ने पर बाहर आती है और तब मुश्किलों को आमंत्रित करती है। इस वजह से हम जो सामान्य तौर पर हमारे दिन में कार्य करते हैं, उस पर भी ज्यादा ध्यान देना बहुत जरूरी है। हमें हमारे जीवन में होने वाले हर एक पहलू पर ध्यान देना बहुत ही आवश्यक है। अगर एक चीज को संभालते हैं, परंतु दूसरी चीज बिगड़ जाती है! तो यह बेवकूफी है! जो हम जानबूझकर करते हैं।

इसीलिए आइए हम देखते हैं, की जोड़ों में और मांसपेशियों में दर्द होने की वजह और वह क्या नुकसान कर सकता है  और उसका आयुर्वेद के द्वारा कैसे नियंत्रण और समाधान किया जा सकता है।

इसके लिए निरामय स्वास्थ्यम् (Best Ayurvedic Treatment Center, Niramay Swasthyam) के द्वारा वैद्य योगेश वाणी जी का स्वास्थ्य व्याख्यान सुनिए और सही मार्गदर्शन और अभ्यास करिए।


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