Uncategorized Joint and Muscle Pain – Ayurveda advice Part 2

Joint and Muscle Pain – Ayurveda advice Part 2


18 Joint and Muscle Pain - Ayurveda advice Part 2 by Niramay Swasthyam

Spread Awareness

जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द का कारण क्या है?

Joint and Muscle Pain – Ayurveda advice Part 2

अलग-अलग जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होता है जिसके बारे में हमें जानना बहुत आवश्यक है। मांसपेशियों में दर्द मांसपेशियों में तनाव होने के कारण ही होता है और शरीर में कहीं भी हो सकता है। अतिरिक्त शारीरिक गतिविधियों के कारण मांसपेशियों में दर्द पैदा होता है। शरीर में लगी चोट जैसे के मोच आना, कहीं से गिर जाना और इस वजह से शरीर के भाव भाग में दर्द हो सकता है। सही तरीके से व्यायाम न करने की वजह से मांसपेशियों में दर्द होता है। यह सामान्य कारणों के अलावा भी

अन्य कारणों से मांसपेशियों में दर्द हो सकता है :

  • फाइब्रॉमायल्जिया ऐसी स्थिति है जो दर्द और दर्द का कारण बनती है।
  • फ्लू जैसे बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण के द्वारा होता है।
  • ल्यूपस और डर्मेटोमायोसाइटिस जैसे ऑटोइम्यून रोग की वजह से होता है।
  • कई दवाओं का दुष्प्रभाव मांसपेशियों में दर्द पैदा कर सकता है।
  • कम पोटेशियम का स्तर मांसपेशियों में दर्द पैदा करता है।
  • थायराइड की समस्या से मांसपेशियों में दर्द हो सकता है।
  • मायोफेशियल दर्द सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है जो दर्द पैदा करने वाले संयोजी ऊतकों को बढ़ाती है।
  • जब जोड़ों के दर्द की बात आती है, तो ज्यादातर समय में यह अर्थराइटिस के कारण होता है। यह आमतौर पर घुटनों, कलाई और कूल्हों में होता है और 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को प्रभावित करता है।
  • जमे हुए कंधे और चिपकने वाला कैप्सूलिटिस इस कंधे के जोड़ों के दर्द का कारण बनता है।
    व्यायाम करने, खेल खेलने, शारीरिक श्रम करने आदि के अतिरिक्त कारण होने की वजह से जोड़ों का दर्द हो सकता है।
  • कुछ प्रकार के कैंसर जोड़ों के दर्द का कारण बन सकते हैं।
  • कोई भी हड्डी के टूटने की वजह से भविष्य में तकलीफ हो सकती है।
  • कोई गहरी चोट लगने की वजह से मांसपेशियों में दर्द रह जाता है।

Related: Joint and Muscle Pain – Ayurveda advice Part 1

आयुर्वेद के अनुसार जोड़ों और मांसपेशियों का दर्द क्या है!

आयुर्वेद के अनुसार रोगो और स्वास्थ्य की समस्याओं में प्राथमिक तरीके से कार्यात्मक ऊर्जा का दृष्टिकोण रखा जाता है और समाधान किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार मुख्य तीन दोष है। वह वात्त, पित्त और कफ होते हैं। यह तीन दोष के संतुलन की स्थिति में होने की वजह से स्वास्थ्य संतुलित रहता है, और यह तीन दोष का असंतुलन होना शरीर में रोगों को पैदा करता है।

मुख्य रूप से वात्त दोष में असंतुलन के कारण जोड़ों में दर्द होता है। वात्त दोष हलन चलन से जुड़ा है। जब यह जोड़ों में जाता है, तो यह लचीलापन को प्रभावित करते हुए कठोरता और दर्द पैदा करता है। ठंड और शुष्क वातावरण में वाद की वृद्धि ज्यादा होती है।

आयुर्वेद से शरीर,

आयुर्वेद शरीर में हो रही पाचन की प्रणाली को संतुलन रखने में ज्यादा ध्यान देता है। क्योंकि पाचन के द्वारा ही शरीर के हर अवयव में पोषण और मांसपेशियों की वृद्धि होती है। इसीलिए आयुर्वेद के द्वारा पाचन में लिए जाने वाले पोषक तत्व को पूरी तरीके से ध्यान में रखा जाता है जिसकी वजह से ही यह दोषों को संतुलन में रखा जा सके। पाचक अग्नि पाचन में मदद करती है। यह अग्नि के कमजोर होने से पाचन प्रभावित हो सकता है। यह शरीर के खराब पाचन तंत्र की ओर जाता है, और जोड़ों को भी प्रभावित कर सकता है। जब अग्नि कमजोर हो जाती है, तो यह एसिड और विषैले पदार्थों का निर्माण का कारण बनती है। जब विषैले पदार्थ जोड़ों में चले जाते हैं तो वात्त पहले से भी बढ़ जाता है और यह गंभीर दर्द और सूजन पैदा कर सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार,

आयुर्वेद के अनुसार विशेष रुप से वात दोष को कम करने की वजह से ही मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द में राहत मिल सकती है और इसके ऊपर ही कार्य किया जाता है। यह दोष को संतुलन करने के लिए आयुर्वेद के द्वारा दी जाने वाले जड़ी बूटी और प्राकृतिक दवाओं के उपयोग से और रसोईघर के परिवर्तन से लाभ मिलता है।

यह दवाओं की मदद से शरीर में बने विषैले तत्व को नियंत्रण में लाया जाता है। इसके अलावा निरामय पंचकर्म का उपयोग करके भी दोषों को संतुलन में किया जाता है। और जीवनशैली में परिवर्तन के द्वारा जोड़ों और मांसपेशियों का स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए, आहार में भी परिवर्तन किया जाता है।

इसी के लिए निरामय स्वास्थ्यम् (Best Ayurvedic Treatment Center, Niramay Swasthyam) के द्वारा निशुल्क आरोग्य व्याख्यान रखा जाता है। जिसमें जोड़ों के दर्द और मांसपेशियों के दर्द के लिए हमारे जीवन शैली में क्या क्या परिवर्तन लाने हैं यह समझाया जाता है। हमारे रसोई घर में लाने वाले परिवर्तन के लिए भी मार्गदर्शन दिया जाता है।

और इंटरनेशनल अवार्ड से सम्मानित वैद्य योगेश वाणी जी के द्वारा निशुल्क नाड़ी चेकअप करके आपके शरीर की प्रकृति को जाना जाता है और यह दोषों का नियंत्रण किस तरीके से करें यह भी मार्गदर्शन दिया जाता है।

क्योंकि पहले यह मानना जरूरी है के शरीर में हुई कोई भी समस्या को मिटाया जा सकता है। अगर शरीर में समस्या का जन्म हुआ है, तो उसके कई कारण हो सकते हैं, कई लंबे समय से वह शरीर में कार्यरत होगी तब जाकर आज असर हो रहा है और समस्या बढ़ गई है।

तो अगर हम तुरंत इसको ठीक करना है, जल्दी ठीक हो जाना चाहिए, एक दवा दे दो और ठीक कर दो, और मुझे ना पसंद हो वैसा करने को मत बताना। ऐसे तर्क अगर हम करेंगे तो, हमारा शरीर जो लंबे समय से बिगड़ते बिगड़ते आखिर में यह समस्या लेकर बैठा है, उससे यह समस्या को मिटाने में तकलीफ होगी।

क्योंकि बहुत लंबे अरसे से होने वाले गलत तरीके की चीजों के बाद यह बीमारियां आती है। तो उसके लिए सही तरीके से कार्य करना भी जरूरी है और आयुर्वेद में यही किया जाता है। अगर आप सही तरीके से जो बताया है, वह सारी चीजों को फॉलो करते हो तो आसानी से और जल्दी से आपकी कोई भी समस्या मिट सकती है। उसके लिए थोड़ी सहनशक्ति और नियमितता रखना बहुत जरूरी है और आयुर्वेद के सही निदान के द्वारा एक समस्या ही नहीं मिटेगी, परंतु उसके साथ आने वाली बहुत समस्या को यह मिटा देता है।

इसीलिए यह समझना बहुत जरूरी है और इसके लिए ही निशुल्क आरोग्य व्याख्यान निरामय स्वास्थ्यम् (Best Ayurvedic Treatment Center, Niramay Swasthyam) उनके द्वारा आयोजित किया जाता है।


Spread Awareness

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *