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Health shlokas and important values of Ayurveda


28 आयुर्वेद द्वारा स्वास्थ्य श्लोक और महत्वपूर्ण मूल्य जानिये। Niramay Swasthyam Best Ayurvedic Treatment Center

स्वास्थ्य श्लोक और आयुर्वेद के महत्वपूर्ण मूल्य जानिये।

Health shlokas and important values of Ayurveda

अपने जीवनशैली में लिए और उचित स्वास्थ्य को पाइए।

१०० साल स्वस्थ कैसे रहे? आयुर्वेद द्वारा स्वास्थ्य श्लोक और महत्वपूर्ण मूल्य जानिये।

षड् दोषाः पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता।

निद्रा तद्रा भयं क्रोधः आलस्यं दीर्घसूत्रता ॥

छ: अवगुण व्यक्ति के पतन का कारण बनते हैं : नींद, तन्द्रा, डर, गुस्सा, आलस्य और काम को टालने की आदत.

अब स्वस्थ रहना है, बड़ा आसान।

 

भुक्त्वोपविशत:स्थौल्यं शयानस्य रू जस्थता।

आयुश्चक्र माणस्य मृत्युर्धावितधावतः॥

भोजन करने के पश्चात एक ही जगह बैठे रहने से, मोटापा आता है। जो व्यक्ति भोजन के बाद चलता है, उसकी आयु में वृद्धि होती है और जो भागता या दौड़ लगाता है, उसकी मृत्यु समीप आती है।

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व्यायामात् लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखं।

आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥

व्यायाम से स्वास्थ्य, लंबी आयु, शक्ति और प्रसन्नता प्राप्त होती है। स्वस्थ रहना परम नियति है और अन्य सभी कार्य स्वास्थ्य द्वारा सिद्ध होते हैं।

अब स्वस्थ रहना है, बड़ा आसान।

 

व्यायामं कुर्वतो नित्यं विरुद्धमपि भोजनम्।

विदग्धमविदग्धं वा निर्दोषं परिपच्यते॥

व्यायाम करने वाला मनुष्य गरिष्ठ, जला हुआ अथवा कच्चा किसी प्रकार का भी खराब भोजन क्यों न हो, चाहे उसकी प्रकृति के भी विरुद्ध हो, भलीभांति पचा जाता है और कुछ भी हानि नहीं पहुंचाता।

स्वस्थ रहो मस्त रहो

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शरीरोपचयः कान्तिर्गात्राणां सुविभक्तता।

दीप्ताग्नित्वमनालस्यं स्थिरत्वं लाघवं मृजा॥

व्यायाम से शरीर बढ़ता है, शरीर की सुन्दरता बढ़ती है। शरीर के सब अंग सुडौल होते हैं। पाचनशक्ति बढ़ती है। आलस्य दूर भागता है। शरीर दृढ़ और हल्का होकर स्फूर्ति आती है। तीनों दोषों की शुद्धि होती है।

अब स्वस्थ रहना है, बड़ा आसान।

 

न चैनं सहसाक्रम्य जरा समधिरोहति।

स्थिरीभवति मांसं च व्यायामाभिरतस्य च॥

व्यायामी मनुष्य पर बुढ़ापा सहसा आक्रमण नहीं करता, व्यायामी पुरुष का शरीर और हाड़ मांस सब स्थिर होते हैं।

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दाक्षिण्यं विरूपामपि स्त्रियं भूषयति, सुरूपामपि अदाक्षिण्यं दूषयति।

शालीनता कुरूप स्त्री को भी सुन्दर बना देती है और अशालीनता सुरुप स्त्री को भी असुन्दर।

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त्रयः उपस्तम्भाः।

आहारः स्वप्नो ब्रह्मचर्यं च सति।

शरीररुपी मकान को धारण करनेवाले तीन स्तंभ हैं: आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य।

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अब स्वस्थ रहना है, बड़ा आसान।

 

श्रमक्लमपिपासोष्णशीतादीनां सहिष्णुता।

आरोग्यं चापि परमं व्यायामदुपजायते॥

श्रम, थकावट, ग्लानि(दुःख), प्यास, शीत, उष्णता आदि सहने की शक्ति व्यायाम से आती है और परम आरोग्य अर्थात् स्वास्थ्य की प्राप्ति भी व्यायाम से ही होती है।

 

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न चास्ति सदृशं तेन किंचित्स्थौल्यापकर्षणम्।

अधिक स्थूलता को दूर करने के लिए व्यायाम से बढ़कर कोई और औषधि नहीं है।

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न च व्यायामिनं मर्त्यमर्दयन्त्यरयो भयात्॥

व्यायामी मनुष्य से उसके शत्रु सर्वदा डरते हैं और उसे दुःख नहीं देते।

 

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शरीरोपचयः कान्तिर्गात्राणां सुविभक्तता।

दीप्ताग्नित्वमनालस्यं स्थिरत्वं लाघवं मृजा॥

व्यायाम से शरीर बढ़ता है। शरीर की कान्ति वा सुन्दरता बढ़ती है।

शरीर के सब अंग सुड़ौल होते हैं। पाचनशक्ति बढ़ती है।

आलस्य दूर भागता है। शरीर दृढ़ और हल्का होकर स्फूर्ति आती है।

तीनों दोषों की (मृजा) शुद्धि होती है।

 

हर स्वास्थ्य समस्या के लिए, Niramay Swasthyam का एक प्रभावी आयुर्वेदिक समाधान है,

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समदोषः समाग्निश्च समधातुमलक्रियः।

प्रसन्नात्मेन्द्रियमनाः स्वस्थ इत्यभिधीयते॥

जिस मनुष्य के दोष वात, पित्त और कफ, अग्नि (जठराग्नि), रसादि सात धातु, सम अवस्था में तथा स्थिर रहते हैं, मल मूत्रादि की क्रिया ठीक होती है और शरीर की सब क्रियायें समान और उचित हैं, और जिसके मन इन्द्रिय और आत्मा प्रसन्न रहें वह मनुष्य स्वस्थ है।

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सही जीवन शैली कहां से पता चलेगी?

निरामय स्वास्थ्यम् (Best Ayurvedic Treatment Center, Niramay Swasthyam) के द्वारा वैद्य योगेश वाणिजी समाज में स्वास्थ्य की जागृति के लिए बहुत प्रयास कर रहे हैं।

लोगों को स्वास्थ्य मिले उसके लिए कई निशुल्क प्रवृत्तियां भी शुरू की है। उसमें सबसे महत्वपूर्ण निशुल्क प्रवृत्ति निशुल्क रोग मुक्ति व्याख्यान है। इसके अलावा भी हर हफ्ते उनके द्वारा निशुल्क स्वास्थ्य केंद्र लिया जाता है। जिसका उद्देश्य यही है की हर मनुष्य स्वास्थ्य के बारे में जागृत हो, स्वस्थ रहने का विज्ञान समझे, और जो जीवनशैली अपनाएं उसकी वजह से उनके स्वास्थ्य में लाभ हो। क्योंकि स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ समाज बना सकता है और स्वस्थ समाज से ही स्वस्थ देश का निर्माण होता है। इसीलिए स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए निरामय स्वास्थ्यम् के द्वारा चलने वाले ऐसे निशुल्क स्वास्थ्य की प्रवृत्तियों का लाभ लीजिए और समाज में जागृति फैलाए।

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