No one is aware of the leanness of life today in 2021 |
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No one is aware of the leanness of life today in 2021

blog 22 दुबलापन (No one is aware of the leanness of life today in 2021)

No one is aware of the leanness of life today in 2021

दुबलापन (No one is aware of the leanness of life today in 2021)

आज अगर दिखने जाए तो पता चलेगा कि बढ़ता हुआ वजन लोगों को बहुत तकलीफ देता है और इसी के लिए सारी जगह उपाय बताए जाते हैं। वजन कम कैसे करें, जीरो फिगर कैसे करें हर जगह स्लिम ट्रिम नजर आना फैशन बन गया है। इसी वजह से दुबलेपन के ऊपर किसी का ध्यान नहीं रहता। जिस तरह से शरीर का ज्यादा बढ़ना नुकसानदायक है उसी तरह से ज्यादा शरीर का कम हो जाना यानी दुबलापन आना भी नुकसानदायक है। दुबलापन भी और स्वस्थ शरीर का निशान है। परंतु आज दुबलेपन को ध्यान में ना लेते हुए सिर्फ और सिर्फ मोटापे से लड़ने और उससे जीतने के ही उपाय बताए जा रहे हैं।

लक्षण

वैसे तो दुबलेपन या दुर्बलता का कोई नाप नहीं है परंतु अधिकतर यह लक्षण के आधार पर दुबलेपन को निर्धारित किया जाता है।

  • शरीर पर हड्डियों का नजर आना।
  • शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाना।
  • नितंब, छाती व पेट के निचले हिस्से पर वसा का ना होना।
  • लंबाई के अनुपात में वजन का कम होना।
  • चेहरा पतला और घॅंसा हुआ नजर आना।
  • थकान, चिड़चिड़ापन, हताशा का प्रकोप रहना।

कारण

  • आनुवंशिकता के द्वारा असर।
  • खाने-पीने में लापरवाही करना।
  • हार्मोंस का असंतुलित होना।
  • पाचन क्रिया का बिगड़ना।
  • मानसिक चिंता का ज्यादा होना।
  • अत्यधिक व्यायाम करना।
  • पेट में कीड़े का होना।
  • हाइपर थायराइड या मधुमेह रोग का लगना।
  • एनीमिया।

आयुर्वेद का नजरिया

आयुर्वेद में अत्यंत मोटे और अत्यंत दुबले शरीर वाले व्यक्तियों को नींदित व्यक्तियों में गिना जाता है। दुबलेपन की समस्या के द्वारा शरीर की स्वाभाविक कार्यप्रणाली सही तरीके से सम्यक रूप से निर्वहन नहीं हो सकती, जिसके परिणाम स्वरूप दुबले व्यक्तियों के शरीर में अनेक बीमारियों का आना आसान हो जाता है और जल्द मृत्यु की संभावना बनी रहती है।

आयुर्वेद के अनुसार अग्निमांद्य या मंद जठराग्नि की वजह से ही दुबलापन होता है। पाचन शक्ति का कम होना ही प्रमुख कारण है। अग्नि के बंद होने की वजह से व्यक्ति कम मात्रा में भोजन करता है, जिसकी वजह से सप्त धातुओं का निर्माण और आहार रस का निर्माण बहुत कम होता है। इसी तरीके से रक्त, मास, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र यह सबका पोषण अल्प मात्रा में होता है। इसी वजह से शरीर दुबला और अति दुबला होता जाता है। इसके अलावा अतिरिक्त लंघन, कम मात्रा का भोजन तथा रूखे अन्य पान की अधिक मात्रा में सेवन यह तत्वों को सही पोषण नहीं देता और इससे ही दुबलापन बढ़ता है।

यौन जीवन पर प्रभाव

यौन जीवन के लिए जरूरी ऊर्जा, उत्साह, सहनशीलता और अन्य चीजों को शुक्र धातु उत्पन्न करता है। परंतु दुर्बलता के कारण शुक्र धातु को भी पूर्ण पोषण नहीं मिल पाता है जिसके चलते यौन जीवन प्रभावित हो जाता है। इसके साथ ही दुबलेपन के कारण व्यक्ति थक भी जल्दी जाता है जिस से मांसपेशियां खींचने लग जाती है और व्यक्ति बड़ी ही आसानी से बिस्तर पर थक जाता है।

समाधान

  • आहार में सही तरीके से कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन और फैट युक्त आहार लेना दुबलेपन को मिटाने के लिए बहुत जरूरी है।
  • ड्राई फ्रूट्स, दूध और घी जैसे भारी खोराक लेना लाभदायक है।
  • अश्वगंधा और शतावरी जैसी प्राकृतिक वनस्पतियों का सेवन भी बड़ा लाभदायक है।
  • आयुर्वेद की पंचकर्म तकनीक के उपयोग से शरीर में सभी दोषो का संतुलन बनाया जाता है और सप्त धातुओं को भी संतुलन में लाया जाता है।
  • दूध के साथ केला यह खुराक भी वजन बढ़ाने में लाभदायक है।
  • नियमित रूप से किया जाने वाला उचित व्यायाम शरीर मैं मांसपेशियों को मजबूत करता है और बढ़ाता है।
  • योग और प्राणायाम के उपयोग से शरीर की अंदरुनी शक्ति बढ़ाई जा सकती है।
  • तिल के तेल से नियमित रूप से मालिश करना भी दुबलेपन में लाभदायक है। इससे मांसपेशियों का प्रमाण बढ़ता है और वह मजबूत होते हैं।

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दुबलापन एक आम बात नहीं है। इसकी गहराई को समझना भी जरूरी है। आयुर्वेद के द्वारा शरीर की हर एक समस्या का निदान हो सकता है। परंतु अगर सही मार्गदर्शन और सही वैद्य का सहारा मिले तो। आयुर्वेद शरीर के सभी चीजों का संतुलन करके उस को स्वस्थ बनाने का ही विज्ञान है। आयुर्वेद का ध्येय यही है के आम मनुष्य भी स्वास्थ्य की बातों को समझ कर 100 साल तक कैसे स्वस्थ रह सकें। आज जो बीमारी के लिए स्वास्थ्य के लिए जो इंसान पैसा खर्च करता है उसे बचाकर वह अपने जीवन में स्वास्थ्य और खुशी को संतुलित रख पाए।

आज अगर देखा जाए तो हमारी जीवन शैली, हमारा खाने-पीने का तरीका, हमारी आदतें ऐसी हो गई है जो हमें हर रोज हमारे स्वास्थ्य से दूर लेकर जा रही है। अगर स्वास्थ्य को संभालना है तो हमें जीवन शैली में बदलाव लाना ही पड़ेगा। पर सही जीवन शैली कहां से पता चलेगी?

सही जीवन शैली कहां से पता चलेगी?

निरामय स्वास्थ्यम् (Best Ayurvedic Treatment Center, Niramay Swasthyam) के द्वारा वैद्य योगेश वाणिजी समाज में स्वास्थ्य की जागृति के लिए बहुत प्रयास कर रहे हैं। लोगों को स्वास्थ्य मिले उसके लिए कई निशुल्क प्रवृत्तियां भी शुरू की है। उसमें सबसे महत्वपूर्ण निशुल्क प्रवृत्ति निशुल्क रोग मुक्ति व्याख्यान है। इसके अलावा भी हर हफ्ते उनके द्वारा निशुल्क स्वास्थ्य केंद्र लिया जाता है। जिसका उद्देश्य यही है की हर मनुष्य स्वास्थ्य के बारे में जागृत हो, स्वस्थ रहने का विज्ञान समझे, और जो जीवनशैली अपनाएं उसकी वजह से उनके स्वास्थ्य में लाभ हो। क्योंकि स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ समाज बना सकता है और स्वस्थ समाज से ही स्वस्थ देश का निर्माण होता है। इसीलिए स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए निरामय स्वास्थ्यम् के द्वारा चलने वाले ऐसे निशुल्क स्वास्थ्य की प्रवृत्तियों का लाभ लीजिए और समाज में जागृति फैलाए।


स्वस्थ रहो मस्त रहो

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