Mon-Fri(9am-7pm)

Arogya Mandir

569, Ambika nagar, Amroli, Surat, Gujarat 394107

Spread Awareness

नींद आप कितनी लंबी ले रहे हो यह महत्वपूर्ण नहीं है पर,

कितनी गहरी ले रहे हो, यह बड़ा महत्वपूर्ण है।

Did you know, better rest and adequate sleep, Increases human work capacity.

सामान्यतः देखा गया है के कुछ भी काम करने के लिए हमारा ध्यान और ऊर्जा का वह काम में लगना जरूरी है। और हमें पता होगा कि जब हमारी नींद पूरी नहीं होती है, तब हमें बेचैनी का, थकान का अनुभव होता है और जब सही तरीके की नींद होती है तब हमारी ऊर्जा, आत्मविश्वास, हमारा ध्यान सही रहता है और हमारे काम में असरकारक बदलाव दिखता है।

बहुत बार यह भी पाया गया है कि हम जब ज्यादा सो जाते हैं, तो उसके बाद भी आलस और बेचैनी बनी रहती है। काम ठीक से नहीं हो पाता।

 तो ऐसा क्यों होता है?

♦ नींद हमारे शरीर, मन, बुद्धि, चेतना सभी चीजों पर गहरा असर करती है।

♦ नींद का सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर भी होता है।

यह एक बड़ी समस्या है कि कितना सोना? कब सोना? कैसे सोना?

यह सब चीजों का आज हम सभी को आधा अधूरा ज्ञान है।

क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार कितने घंटे की नींद ले रहे हो, यह महत्वपूर्ण नहीं है परंतु कितनी अच्छी नींद ले रहे हो, यह बहुत महत्वपूर्ण है।

क्योंकि ऐसे भी बहुत लोग हैं, जिन्होंने खुद पर प्रयत्न करके अपनी नींद को धीरे-धीरे करके 4 और 5 घंटे तक घटाया है, और उससे भी कम समय की नींद लेते हैं!

फिर भी बहुत असरकारक काम करते हैं। पर इसके लिए एक सही मार्गदर्शन और सही दिशा में प्रयत्न करने की जरूरत पड़ती है।

पर हम पहले यह जानते हैं कि,

कितनी उम्र के लोगों को कितनी नींद लेनी चाहिए,

⇒ 12 महीने के बच्चे को – 14.5 घंटे

⇒ 2 साल तक के बच्चों को – 13 घंटे

⇒ 5 साल तक के बच्चों को -11 घंटे

⇒ 10 साल तक के बच्चों को -10 घंटे

⇒ 16 साल तक के बच्चों को – 8.5 घंटे

⇒ 16 से 45-50 साल तक – 7 से 7.5 घंटे

⇒ 50 से ऊपर को – 5-6 घंटे

इस तरीके से हर एक उम्र के साथ कितनी नींद लेना यह महत्वपूर्ण है। परंतु योग प्राणायाम के अभ्यास से इस पर काबू भी पाया जा सकता है और इसे घटाया भी जा सकता है। परंतु सामान्यतः इतनी नींद लेना आम इंसान के लिए आवश्यक है।

अगर इससे ज्यादा नींद हो रही है और इससे कम नींद भी होती है, तो यह स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है।

जैसे के पुख्त मनुष्य के लिए 5 घंटे से कम और 8 घंटे से ज्यादा नींद बहुत हानिकारक होती है। यह 50% से ज्यादा नुकसान कारक होता है हमारे स्वास्थ्य के लिए।

अच्छी नींद के फायदे,

मन शांत और स्वस्थ होता है।

शरीर के कोषों का विकास अच्छा होता है।

शक्ति और स्वास्थ्य बढ़ता है।

रोगप्रतिकारक शक्ति में बढ़ावा होता है।

ज्ञान और बुद्धि का विकास होता है।

लंबा आयुष्य मिलता है।

यौन संबंध में भी लाभ होता है।

रचनात्मकता (Creativity) और समझ शक्ति बढ़ती है।

और अगर कम नींद ले रहे हैं! और हद से ज्यादा नींद ले रहे हैं! तो इससे विपरीत सारे नुकसान होते हैं।

नींद लेने का सही समय,

सामान्यत: आयुर्वेद के अनुसार रात को 9:00 से 10:00 बजे के बीच में सो ही जाना चाहिए।

हमारे शरीर का एक चक्र होता है, जो सोने के बाद शुरू होता है। गहरी नींद में जाने के लिए हमें 2 से 2.5 घंटे लगते हैं, और 12 से 2:00 बजे का जो समय होता है, यह सबसे उत्तम और गहरी नींद का समय होता है।

तो अगर आप 10:00 बजे सो रहे हो तभी जाकर 12:00 बजे तक आप इतनी गहराई तक पहुंच पाओगे और गहरी नींद को पाओगे। और बाद में जितना सोने में समय लगता है उतना आपकी गहरी नींद का समय कम हो जाता है।

 इस वजह से काफी बार हमने अनुभव किया होगा 12:00 बजे जब सो जाते हैं सुबह 8:00 बजे उठते हैं फिर भी नींद पूरी हुई नहीं लगती है।

क्योंकि जब गहरी नींद का समय था तब आपने अभी नींद की शुरुआत करी थी।

इस तरह आप जब सो जाते हो, तब 45 मिनट का एक चक्र, वैसी 9 चक्र कम से कम पुरे होने चाहिए।

आयुर्वेद के अनुसार सूर्योदय से 20 मिनट पहले उठ जाना चाहिए, नींद खत्म हो जानी चाहिए। यह आपके लिए स्वास्थ्य दायक है और उर्जा को भी बढ़ाता है।

दिन में सोना?

आयुर्वेद के अनुसार दिन में सोना, यह नकारात्मक असर करता है।

यह पाचन तंत्र (Digestive system), लीवर (Liver), रक्त परिसंचरण (Blood circulation) और कई चीजों को शरीर में असंतुलित करता है।

परंतु रात में काम करने वाले लोगों के लिए थोड़ी छूट है।

और सामान्यतः दिन के समय में दोपहर के भोजन के बाद 20 से 25 मिनट सोना लाभदायक होता है, पर इससे ज्यादा सोना नहीं चाहिए।

अच्छी नींद कैसे लाएं?

सोने के समय से 2 घंटे पहले टीवी, मोबाइल जैसे उपकरणों को दूर रखें और उसका उपयोग ना करें। क्योंकि उसकी स्क्रीन में से निकलने वाली किरणें मेलाटोनिन हार्मोंस को प्रभावित करती है, जो नींद लाने के लिए जिम्मेदार होता है।

जहां सो रहे हैं, वह कमरे में भी अधिक प्रकाश नहीं होना चाहिए। यह प्रकाश भी नींद आने में तकलीफ पैदा करता है।

अगर सोने का समय निश्चित किया जाए तो शरीर का चक्र उसके अनुसार निश्चित हो होता है। इस कारण से जब हम सो जाते हैं, तो तुरंत नींद आती है।

सोते समय आरामदायक स्थिति में होना बहुत आवश्यक है, इसलिए सोते समय कपड़े बिल्कुल ढीले और ऐसे होने चाहिए जिससे उलझन ना हो।

सोने से पहले कुछ अच्छी आदत होगी तो बेहतरीन होगा, जैसे के गुनगुने पानी से नहाना (नमक वाले पानी से भी नहा सकते हैं), शांत संगीत सुनना, अच्छी पर मोटिवेशनल किताब को पढ़ना, संस्कृत के श्लोकों का उच्चारण करना, परिवार के साथ बैठकर अच्छी और सकारात्मक बातें करना।

दोपहर को 20 मिनट से अधिक नहीं सोना चाहिए, इसकी वजह से ही रात को अच्छे से नींद आएगी।

अच्छी नींद जीवन में कितनी महत्वपूर्ण है, यह समझना जरूरी है। नींद के समय पर ही, शरीर में रही बीमारियों से शरीर लड़ता है। हमारी रोगप्रतिकारक शक्ति सबसे अधिक सक्रिय होती है। इस कारन से यह चीजों का सही तरीके से नियमन हो और स्वास्थ्य बना रहे इसके लिए अच्छी नींद का लेना बहुत महत्वपूर्ण है।

यह सारी चीजें जानकर, हमें समझ में आता है कि हम कितने घंटे सो रहे हैं! कितना लंबा सो रहे हैं! यह महत्वपूर्ण नहीं है, परंतु कितना गहरी नींद ले रहे हैं, अच्छा सो रहे हैं यही सबसे महत्वपूर्ण है।

और अगर आपको दिन का और कार्य करने का समय बढ़ाना हो, समाज में कुछ बड़ा करना हो तो अपना नींद का समय कम कर सकते हो, पर उसके लिए योग, प्राणायाम का सही अभ्यास और मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।

इसके लिए निरामय स्वास्थ्यम् (Best Ayurvedic Treatment Center, Niramay Swasthyam) के द्वारा वैद्य योगेश वाणी जी का स्वास्थ्य व्याख्यान सुनिए और सही मार्गदर्शन और अभ्यास करिए।


निःशुल्क स्वास्थ्य व्याख्यान में अलग अलग विषयों पर उचित जानकारी दी जाती है। स्वास्थ्य व्याख्यान इंटरनेशनल अवॉर्ड सन्मानित वैद्य के द्वारा लिया जाता है।


Spread Awareness
TopBack to Top