Madhumeh or Diabetes in many adults and older people! |
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Madhumeh or Diabetes in many adults and older people!

Madhumeh or Diabetes in many adults and older people!

अनेकों प्रौढ़ व वृद्ध लोगों में मधुमेह या डायबिटीज!!

डायबिटीज मेलिट्स रक्त में ग्लूकोज की अधिक मात्रा (हाइपरग्लाइसेमिया) और अधिक पेशाब में शर्करा जाने (ग्लाइकोसूरिया) से सम्बन्धित एक रोग है | यह इन्सुलिन नामक हार्मोन की कमी के कारण होता है |

हमारे शरीर की ऊर्जा जिस मुख्य ईंधन से आती है, वह शुगर या शर्करा जो की रक्त द्वारा एक सरल रूप से वहन की जाती है | इसे ग्लूकोज कहा जाता है | यह शरीर की सभी कोशिकाओं, अधिक महत्वपूर्ण मांसपेशी – कोशिकाओं और मस्तिष्क तक पहुंचाई जाती है | ग्लूकोज का एक सहायक हार्मोन होगा है जिसे इन्सुलिन कहा जाता है | यह अग्नाशय या पेन्क्रियाज द्वारा पैदा किया जाता है | यह ग्लूकोज को कोशिकाओं में प्रवेश करने में सहायता देता है और इस तरह हमारे रक्त में उसकी मात्रा कम करता है ग्लूकोज कोशिकाओं को  प्रदान करता है |

डीएम में निम्न कारणों से रक्त का ग्लूकोज शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाता :

  1. इन्सुलिन का अपर्याप्त मात्रा में बनना|
  2. शरीर की कोशिकाओं (लक्षित अंगों की, जैसे मस्तिष्क, मांसपेशियां इत्यादि ) का इन्सुलिन के प्रति असंवेदनशील यानी इन्सुलिन प्रतिरोधी होना |

डायबिटीज के प्रकार

डायबिटीज मेलिट्स मुख्यत: दो प्रकार का होता है, लेकिन दोनों में बहुत भिन्नता होती है :

पहली प्रकार को इन्सुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज मिलेट्स (पक्कड) भी कहा जाता है और यह आम तौर पर युवाओं में पाया जाता है | उन्हें नियमित रूप से इन्सुलिन लेनी पड़ती है अन्यथा कोमा में जाने या मृत्यु का खतरा होता है |

दूसरी प्रकार को नॉनइन्सुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज मिलेंट्स (छ्पक्क्ड) भी कहा जाता है | इसे ‘मेच्योरिटी ऑनसैट डीएम्’ का नाम भी दिया जाता है | यह आम तौर पर प्रौढ़ व वृद्ध लोगों में पाया जाता है, और उसे आहार, व्यायाम तथा मूँह के जरिए ली जाने वाली डायबिटीज प्रतिरोधी दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है |

65 या उससे अधिक आयु के 10 प्रतिशत लोग इससे प्रभावित हैं | उम्र बढ़ने के साथ ग्लूकोज को वहन करने की क्षमता कम होने लगती है और अनेकों प्रौढ़ वृद्ध लोगों को उम्र बढ़ने के साथ डायबिटीज की शिकायत हो जाती है | अत: यह उम्र से जुडा रोग हैं और इसमें निम्न बातों से खतरा होता है :

  • मोटापा : अधिक वजन होना
  • ऐसी जीवन शैली जिसमें शारीरिक सक्रियता कम हो
  • दीर्घकालिक बीमारी
  • स्टीरौइड जैसी दवाएँ

डीएम् के लक्षण

रोगी में डीएम् के आम लक्षण प्रकट हो भी सकते हैं और नहीं भी |

ये आम लक्षण हैं : बहुत मात्रा में पेशाब जाना, बहुत अधिक प्यास लगना खुजली होना |

रोगी में स्नायु- संबद्धता (न्यूरोपैथी) जैसी जटिलताएँ विकसित हो सकती हैं या दीर्घकालिक त्वचा- संक्रमण हो सकता है|

महिलाओं को डायबिटीज होने की आशंका

उन महिलाओं को डायबिटीज होने की आशंका होती है जिन्होंने अधिक वजन वाले बच्चों को जन्म दिया हो, किसी अज्ञात कारण से जिनका भ्रूण गिर गया हो या जिनमें हैद्रोमिनिओस (शिशु – थैली में बहुत अधिक मात्रा में तरल होना) या प्री – एक्लैम्सिया (गर्भावस्था के दौरान दौरे/ झूरझूरियाँ आना ) जैसी जटिलताएँ पैदा हो गई हों)

अनेकों रोगियों में रूटीन जाँच के दौरान ही डायबिटीज का पता लग जाता है आम तौर पर अधिक वजन वाले लोगों में डायबीटीज मेलिट्स टाइप-2 पाया जाता है | शरीर में चर्बी के वितरण का अपना तरीका होता है | यह ऊपर के हिस्से के पेट, सीने, गर्दन और चेहरे जैसे अंगों पर अधिक होती है | लेकिन, सामान्य वजन वाले कुछ लोगों को भी डायबीटीज मेलिट्स टाइप-2 में आम तौर पर परिवार में इस रोग का इतिहास मिलता है |

निदान

डायबीटीज मेलिट्स टाइप-2 में आम तौर पर इन्सुलिन के इंजेक्शनों की जरूरत नहीं होती और इसे मुंह से ली जाने वाली दवाओं (रक्त शर्करा को कम करने वाली हैपोग्लैसेमिक दवाएँ) के द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है |

उपचार शुरू करने के बाद, जल्द ही रोगी पहले के मुकाबले स्वस्थ महसूस करने लगता है | जटिलताओं से बचने के लिए, जहाँ तक संभव हो रक्त शर्करा के स्तर को नीचे रखना बहुत जरूरी है | डायबीटीज मेलिट्स टाइप -2 में ऐसा करना मुश्किल नहीं होता |

उपचार के लिए निम्न कदम उठाए जाने चाहिए :

  • उचित आहार के बार में राय लें |
  • नियमित व्यायाम करें |
  • परामर्श से निर्धारित दवाएँ खाएँ |
  • रोग संबंधी जटिलताओं को नियंत्रित करें |
  • रोगी को अपने रोग के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए |

डॉक्टर के परामर्श से निर्धारित दवाएँ नियमित खानी चाहिए | इन्हें बंद नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने पर रक्त में ग्लूकोज फिर से बढ़ना शुरू हो जाएगा | डायबीटीज के अच्छी तरह नियंत्रित हो जाने के बाद भी डॉक्टर से नियमित रूप से परामर्श करना चाहिए और कोई समस्या होने ओर उससे चर्चा करने चाहिए |

उपचार बिना दवाओं के

अतीत में वृद्ध लोगों के डायबीटीज का उपचार आक्रामक रूप से नहीं किया जाता था, लेकिन अब यह अहसास किया जाने लगा है की जटिलताओं को रोकने के लिए इस तरह का उपचार जरूरी है |

टाइप – 2 डीएम का शूरूआती उपचार बिना दवाओं के किया जाता है | इसमें उपयुक्त आहार व व्यायाम की सलाह दी जाती है और रोगी को उसके रोग के बारे में शिक्षित किया जाता है |

खासकर व्यायाम पर जोर दिया जाता है, क्योंकी इससे इन्सुलिन के प्रति प्रतिरोध में कमी आती है, लिपिड संबंधी असामान्यताओं में सुधार आता है |

इसके अलावा, यह उच्च रक्तचाप के रोगियों व अधिक वजन वाले लोगों के लिए लाभकारी होता है |

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